दीपक कुमार का ब्लॉग

कविता तो बस जीवन है, हमें सहलाती, बहलाती, पुचकारती………

 

कई बातें चाह कर भी,हम कह नहीं पाते हैं|

भावनाओं के बहाव में हमारे शब्द बह जाते हैं|

कुछ लम्हें जिनमें हम सोचते जाते हैं|

शब्दों के रूप में उभरकर वे विचार कवितायें बन जाते हैं।