प्यार और विश्वास

केवल मैं ही तुम्हें प्यार नहीं करता|

हाँ, यह सच है

केवल मैं ही तुम्हें प्यार नहीं करता|

मेरे कान

तुम्हारे शब्दों से प्रेम करते हैं,

तुम्हारे हाथों को चाहती हैं

मेरी उंगलियाँ,

मेरी नजरें भी

तुम्हारे चेहरे को ही

ढूँढती हैं,

मेरे होठ भी

तुम्हारे होठों के

स्पर्श की बाट जोहते हैं;

और इन सबके बाद भी

जब तुम कहती हो

कि

तुम मुझे प्यार नहीं करते,

तब-

मेरा विश्वास प्यार पर से

उठने-उठने को होता है,

और मैं घबराकर

दूर चला जाता हूँ तुमसे

तभी-

निगाहों में तुम झलक जाती हो

और तब

मेरा विश्वास

इस प्यार पर

और भी  गहरा जाता है|

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