कविता-समय
July 29, 2006 at 10:15 am (कविता)
कहे
और
अनकहे का
अन्तर जिस समय होता है
जो भी होता है
जहाँ कहीं भी होता है -
क्या कभी
इतना स्पष्ट होता है
कि
उकेर सकें उसे
हम
अक्षरों,
शब्दों,
पन्नों,
या फिर
पुस्तकों में?
जतला पाना भी
इस अन्तर को
हो नहीं पाता|
कहीं यही
कविता के जन्म का
समय तो नहीं?