तनहाईयाँ

तनहाईयाँ चारों तरफ़
आओ मुझे बहलाने

घाव मन मे जो उगे हैं
हाथ से सहलाने |

बिन तुम्हारे जीवन सुना
रंग नहीं है कोई

सांसे तो अब भी लेता हूँ
खुशबू नहीं है कोई |

बाहों मे भर लो फ़िर आज
प्रियतम मेरे कहाँ हो

एक बार बस पुकारो हमें
जीवन मेरे कहाँ हो? 

1 Comment

  1. kumar saurabh said,

    March 19, 2006 at 1:46 pm

    Not good, Deepak. Is track ko chhodo. Yah sarleekaran hai. Shabdon ke apvyaya se bacho.
    Kumar saurabh

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