दीपक कुमार का ब्लॉग
March 16, 2006 at 11:02 am (आरम्भ)
कविता तो बस जीवन है, हमें सहलाती, बहलाती, पुचकारती………
कई बातें चाह कर भी,हम कह नहीं पाते हैं|
भावनाओं के बहाव में हमारे शब्द बह जाते हैं|
कुछ लम्हें जिनमें हम सोचते जाते हैं|
शब्दों के रूप में उभरकर वे विचार कवितायें बन जाते हैं।
Nitin Saurabh said,
April 2, 2006 at 7:41 am
nice yar…….
teri kavitaon ke baare me tippanni karne ka arth surya ko deepak dikhane ke barabar hai…..
Best Of Luck
Amit said,
April 2, 2006 at 7:14 pm
बहुत अच्छे, वर्डप्रैस को अपनाने पर बधाई। इसे निश्चित रूप से सर्वश्रेष्ठ पाएँगे।
Amit said,
April 2, 2006 at 7:17 pm
और साथ ही एक बढ़िया लिबास चुनने पर भी मुबारकबाद।