दीपक कुमार का ब्लॉग

कविता तो बस जीवन है, हमें सहलाती, बहलाती, पुचकारती………

 

कई बातें चाह कर भी,हम कह नहीं पाते हैं|

भावनाओं के बहाव में हमारे शब्द बह जाते हैं|

कुछ लम्हें जिनमें हम सोचते जाते हैं|

शब्दों के रूप में उभरकर वे विचार कवितायें बन जाते हैं।

3 Comments

  1. Nitin Saurabh said,

    April 2, 2006 at 7:41 am

    nice yar…….
    teri kavitaon ke baare me tippanni karne ka arth surya ko deepak dikhane ke barabar hai…..
    Best Of Luck

  2. Amit said,

    April 2, 2006 at 7:14 pm

    बहुत अच्छे, वर्डप्रैस को अपनाने पर बधाई। इसे निश्चित रूप से सर्वश्रेष्ठ पाएँगे। :)

  3. Amit said,

    April 2, 2006 at 7:17 pm

    और साथ ही एक बढ़िया लिबास चुनने पर भी मुबारकबाद। :)

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